“एनएमसी विधेयक (NMC Bill) 2019, विद्यार्थियों से ले कर मरीजों के हित में साबित होगा मील का पत्थर”

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम (NMC Bill), 2019 ऐतिहासिक बताया उन्होंने कहा कि ये बिल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा सुधार है और यह अधिनियम आने वाले वर्षों में मील का पत्थर साबित होगा।

एनएमसी विधेयक (NMC Bill) 2019 के लिए प्रधानमंत्री का आभार

एनएमसी विधेयक (NMC Bill) 2019 पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए, डॉ. हर्षवर्धन ने कहा “मैं माननीय प्रधानमंत्री के प्रति आभारी हूं जिनके मजबूत नेतृत्व में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम (NMC Bill)” पारित हुआ।

विद्यार्थियों पर बोझ कम करेगा, चिकित्सा शिक्षा लागत में कमी

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि यह अधिनियम प्रगतिशील है जो विद्यार्थियों पर बोझ कम करेगा, चिकित्सा क्षेत्र में शुचिता सुनिश्चित करेगा, चिकित्सा शिक्षा लागत में कमी लाएगा, प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, भारत में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने में सहायक होगा तथा गुणवत्ता सम्पन्न शिक्षा और लोगों को गुणवत्ता सम्पन्न स्वास्थ्य देखभाल सुविधा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तनकारी सुधार है और मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में एनएमसी के अतंर्गत देश में चिकित्सा शिक्षा शिखर पर पहुंचेगी।

विधायक पर पांच साल पहले से ही काम शुरू

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार विधेयक पर पांच वर्ष पहले काम शुरू हुआ जब चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में समस्याओं का अध्ययन करने के लिए प्रो. रंजीत राय चौधरी के नेतृत्व में विशेषज्ञों का समूह बनाया गया था। विशेषज्ञों के समूह ने पाया कि भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) सभी क्षेत्रों में विफल रही है और अत्यधिक भ्रष्ट और प्रभावहीन संस्था हो गई है। समूह ने सिफारिश की कि पारदर्शी तरीके से चुने गए स्वतंत्र नियामकों को निर्वाचित नियामकों की जगह लेनी चाहिए।

एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए समान प्रवेश परीक्षा (NEET) और समान काउंसलिंग प्रक्रिया की व्यवस्था है

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम (NMC Bill) 2019 विद्यार्थियों के अनुकूल है। इसमें देशभर के चिकित्सा संस्थानों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए समान प्रवेश परीक्षा (नीट) और समान काउंसलिंग प्रक्रिया की व्यवस्था है।

नेशनल एक्जिट टेस्ट (NEXT) के बाद मिलेगी डॉक्टरी का लाइसेंस और एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री

उन्होंने बताया कि मौजूदा प्रणाली में प्रत्येक विद्यार्थी को अंतिम वर्ष की परीक्षा देनी पड़ती है। एनएमसी अधिनियम के अंतर्गत अंतिम वर्ष की परीक्षा देशव्यापी होगी और इसे नेशनल एक्जिट टेस्ट (NEXT) कहा जाएगा।

यह परीक्ष (i) डॉक्टरी का लाइसेंस (ii)एमबीबीएस की डिग्री और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सुविधा देगी।

स्तनातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी समान काउंसलिंग का प्रावधान है। विद्यार्थी सभी मेडिकल कॉलेजों और एम्स, पीजीआई चंडीगढ़ तथा जिपमर जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में प्रवेश पा सकेंगे।

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