नींबू वर्गीय फलों के पौधों से सालों भर कमाए

नींबू वर्गीय फलों की बागवानी कर किसान भाई अधिक से अधिक लाभ कमा सकते है। हमारे देश में केले और आम के बाद नींबू का उत्पादन में  तीसरा स्थान है। इन फलों को आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड, बिहार, असाम, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक उगाया जाता है। इस फल की उपलब्धता सालों भर रहती है, जिसके कारण यह बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे करें नींबू की खेती

जलवायु एवं मिट्टीः- नींबू वर्गीय फलों की बागवानी उपोष्ण तथा उष्णीय, दोनों प्रकार की जलवायु में अच्छी तरह से की जा सकती है। इस वर्ग के फलों की सामान्यतया बागवानी दोमट तथा बलुई दोमट मिट्टी,जहां जल निकास का उत्तम प्रबंधन हो एवं पी.एच.5.5 से 7.2 तक हो, उपयुक्त है। अच्छी बढ़वार तथा पैदावार के लिए मिट्टी की गहराई 4 फीट से अधिक होनी चाहिए।

पौधा रोपण :- प्रजातियों तथा किस्मों के आधार पर पंक्ति से पंक्ति तथा पौध से पौध की दूरी का निर्धारण करना चाहिए। साधारणतया कागजी नींबू, लेमन, मौसमी, ग्रेपफ्रूट तथा टेनजेरिन को 4.4 मीटर या 5.5 मीटर की दूरी पर लगाते हैं। पौध रोपण से पहले 3.3 3 फुट आकार के गड्ढ़े खोद लिए जाते हैं। 10-15 दिनों बाद इन गड्ढ़ों को मिट्टी तथा सड़ी हुई गोबर की खाद (1/1के अनुपात में) भरने के बाद हल्की सिंचाई करें। इसके बाद पहली बरसात के बाद चुनी हुई किस्मों के पौधों का रोपण करना चाहिए।

खाद एवं उर्वरकः- खाद तथा उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। उपोष्ण जलवायु में गोबर की खाद की पूरी मात्रा का प्रयोग दिसंबर-जनवरी में तथा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग दो बराबर मात्रा बांटकर करना चाहिए। लेमन को छोड़कर सभी किस्मों में पहली खुराक मार्च में और दूसरी जुलाई- अगस्त में देना चाहिए। लेमन में उर्वरक एक बार मार्च-अप्रैल में प्रयोग करना चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग करते समय पर्याप्त नमी होनी चाहिए, अन्यथा प्रयोग के बाद सिंचाई आवश्यक है। अगर दीमक की समस्या हो तो क्लोरोपाइरीफॉस या नीम की खली का प्रयोग करें।

सिंचाईः– उपरोक्त सभी प्रजातियों का रोपण करने के तुरन्त बाद बाग की सिंचाई करें। पौधों की सिंचाई उनके आस-पास गर्मियों के मौसम में हर 10 या 15 दिनों के अंतर पर और सर्दियों के मौसम में प्रति 4 सप्ताह बाद सिंचाई करनी चाहिए। सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि सिंचाई का पानी पेड़ के मुख्य तने के सम्पर्क में न आए। इसके लिए मुख्य तने के आसपास मिट्टी डाल देनी चाहिए। उपोष्ण जलवायु में अच्छे फूलन के लिए फूल आने से पहले तथा इसके दौरान सिंचाई न करें।

फलों की तुडाईः- उपरोक्त किस्मों की तुड़ाई अलग-अलग समय पर की जाती है। लेमन तथा कागजी नींबू 150 – 180 दिनों में पककर तैयार हो जाते हैं। वहीं मीठी नारंगी तथा ग्रेपफूट 260 -280 दिनों में पकते हैं। इसके अलावा किन्नों तथा टेंजेरिन 300 से अधिक दिनों में पकते हैं। फलों को तोड़ते समय इस बात की विशेष सावधानी बरतनी होती है कि फलों की तुड़ाई बाजार की मांग तथा प्रचलित फलों के मूल्य को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। कागजी नींबू एवं लेमन के फल हल्के पीले होने पर तोड़ने चाहिए, जबकि मीठी नारंगी तथा किन्नो का कुल ठोस पदार्थ तथा अम्लता का अनुपात 1/4 से अधिक हो, तो तोड़ने चाहिए।

नींबू का नासूर

केंकर रोगः- यह मुख्यतया कागजी नीबू तथा ग्रेपफ्रूट के पौधों और फलों को प्रभावित करता है। बरसात के मौसम में यह रोग आमतौर पर दिखाई देता है। यह पत्तियों, टहनियों, कांटों और फलों को प्रभावित करता है। सबसे पहले पौधों के उक्त भागों में छोटे- छोटे हल्के पीले रंग के धब्बे पड़ जाते है। अंततः ये धब्बे उठे हुए और खुरदरे हो जाते है। इस रोग की रोकथाम हेतु मुख्यतः प्रभावित शाखाओं को काटकर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर का घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके अलावा, स्ट्रेप्टोसाइक्लीन नामक रसायन की एक ग्राम मात्रा को 50 लीटर पानी में घोलकर 3 व 4 बार छिड़कने से अथवा एक गरम पानी की खली को 20 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव से भी इस रोग से भी इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है।

The News Diary Online

The News Diary is a online News Portal. The News Diary news portal covers latest news in politics, entertainment, Bollywood, business, sports, health & art and culture . Stay tuned for all the breaking news.

Leave a Reply

Next Post

हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है, डायबिटीज के मरीजों में

Sat Aug 10 , 2019
जिन लोगों को टाइप-2 डायबिटीज की समस्या है उनमें अन्य डायबिटीज रोगियों के मुकाबले हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो इसे नियंत्रित करने के साथ-साथ हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए अपने ब्लड शुगर लेवल को प्रबंधन करने की आवश्यकता […]

Breaking News

%d bloggers like this: